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    NEWSBUZZ INDIA

    महाजन रेंज में चक्रव्यूह रच दुश्मन पर 'खड़ग' प्रहार:युद्धाभ्यास में ड्रोन स्वार्म, हैवी आर्टिलरी और अपाचे-रुद्र की सटीक स्ट्राइक

    6 months ago

    महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में पश्चिमी कमान का हाई-इंटेंसिटी सैन्य अभ्यास ‘खड़ग शक्ति 2026’ दमदार प्रदर्शन के साथ संपन्न हो गया। पहली बार ‘चक्रव्यूह’ रणनीति रचकर दुश्मन के ठिकानों पर समन्वित प्रहार का लाइव सिमुलेशन किया गया। टैंक, मिसाइल, रॉकेट लॉन्चर और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की गूंज से थार का रेगिस्तान थर्रा उठा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसे पश्चिमी कमान का अब तक का सबसे बड़ा और तकनीक-आधारित कॉम्बैट ड्रिल माना जा रहा है। अभ्यास में नेटवर्क-केंद्रित युद्ध, ड्रोन ऑपरेशन्स, एयरबोर्न क्षमता और इंटीग्रेटेड फायर पावर का व्यापक प्रदर्शन हुआ। आर्मी कमांडर की मौजूदगी में अंतिम चरण अभ्यास के समापन चरण में पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर मनोज कुमार कटियार और कोर कमांडर राजेश पुष्कर मौजूद रहे। उनके समक्ष आर्टिलरी फायर, एयरबोर्न ऑपरेशन्स और संयुक्त युद्धाभ्यास के जरिए वास्तविक युद्धक्षेत्र का सजीव सिमुलेशन किया गया। 8 से 10 हजार फीट की ऊंचाई से सैनिकों को कॉम्बैट लोड के साथ पैराड्रॉप कर त्वरित तैनाती और तत्काल प्रतिक्रिया क्षमता का प्रदर्शन किया गया। अपाचे और रुद्र की सटीक स्ट्राइक अभ्यास में AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों ने सटीक प्रहार कर अपनी स्ट्राइक क्षमता दिखाई। स्वदेशी HAL रुद्र (एएलएच-डब्ल्यूएसआई) हेलीकॉप्टर ने एयर-ग्राउंड कोऑर्डिनेशन का प्रभावी प्रदर्शन किया। चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों ने रैकी और सपोर्ट मिशन संभालकर समन्वित युद्ध रणनीति को मजबूती दी। ड्रोन टेक्नोलॉजी केंद्र में ‘खड़ग शक्ति 2026’ में ड्रोन को केंद्रीय भूमिका दी गई। ‘खड्गा’ और ‘ऐरावत’ जैसे स्वदेशी ड्रोन तथा टेथर्ड ड्रोन के जरिए लक्ष्य पहचान, निगरानी और समन्वित हमले की रणनीति प्रदर्शित की गई। ड्रोन स्वार्म ने आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका का प्रदर्शन किया। लॉजिस्टिक ड्रोन ने करीब 200 किलोग्राम भार उठाकर भविष्य के युद्धक्षेत्र में आपूर्ति प्रणाली की नई संभावनाएं दर्शाईं। सैनिकों को काउंटर-यूएवी रणनीति, मल्टी-लेयर एयर डिफेंस और ड्रोन हमलों से बचाव का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। ‘स्मर्च’ और भारी तोपों की गड़गड़ाहट महाजन रेंज टैंक और भारी तोपों की गर्जना से गूंज उठी। BM-30 स्मर्च मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से लंबी दूरी तक रॉकेट दागे गए। रात्रिकालीन चरण में नाइट आर्टिलरी फायरिंग, रॉकेट लॉन्चर ऑपरेशन्स और उन्नत हथियार प्रणालियों के साथ 24x7 युद्ध तैयारी का मूल्यांकन किया गया। टी-72, बीएमपी और पैदल सेना का संयुक्त धावा अभ्यास में टी-72 टैंक, BMP इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल्स और पैदल सैनिकों ने ‘कॉम्बाइंड आर्म्स अटैक’ का प्रदर्शन किया। बख्तरबंद और यंत्रीकृत इकाइयों के साथ पैदल सेना ने दुश्मन के मोर्चों पर समन्वित तरीके से हमला करने की रणनीति दिखाई। सैनिकों को नजदीकी मुकाबले, शहरी युद्ध और ड्रोन-सहायता प्राप्त ऑपरेशन्स के लिए प्रशिक्षित किया गया। मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की परीक्षा अभ्यास के दौरान थल, वायु, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को एकीकृत करते हुए मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की व्यापक परीक्षा की गई। इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस, इंटेलिजेंस और सर्विलांस सिस्टम के जरिए पूरे युद्धक्षेत्र में त्वरित निर्णय और नियंत्रण क्षमता का प्रदर्शन किया गया। ‘खड़ग शक्ति 2026’ भारतीय थलसेना की आधुनिक, तकनीक-आधारित और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध तैयारी का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। महाजन रेंज में हुआ यह अभ्यास भविष्य के युद्ध परिदृश्य के लिए सेना की तत्परता और सामरिक क्षमता का मजबूत संदेश देता है।
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