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    NEWSBUZZ INDIA

    अवैध खनन का मामला:बांध बारैठा के 200 मीटर दूर अवैध खनन, रात-दिन ड्रिलिंग से दरक रही है चट्टान, सीपेज का खतरा बढ़ा

    6 months ago

    इको सेंसिटिव जोन में आने वाले बंशी पहाड़पुर को खनन माफिया छलनी करने का कार्य कर रहे हैं, जिससे जिले की जीवनदायिनी बांध बारैठा डैम की जल सुरक्षा भी खतरे में है। 29 फीट गहरे, 1.16 किलोमीटर तक फैले मिट्टी के डैम से सिर्फ 200 मीटर पर कंप्रेशर व ड्रिलिंग मशीन से 1.2 मिमी/सेकंड व 1 किलोमीटर की दूरी पर 0.03 मिमी/सेकेंड का माइक्रो कंपन उत्पन्न कर रही हैं, जो नए सीपेज के रास्ते बनाने से लेकर पुराने सीपेज चैनल को चौड़ा करने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही पाइपिंग की भी संभावना दो से तीन गुना बढ़ा रहे हैं, जो आगे चलकर 160 साल पुराने मिट्टी के डैम के लिए खतरा बन सकता है, जिससे भविष्य में 28 गांव 12 पंचायतों के लिए जल संकट उत्पन्न हो सकता है। रियासतकाल से भरतपुर शहर के लिए पेयजल आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत बांध बारैठा डैम रहा है। इस से 28 गांव 12 पंचायत सहित केवलादेव पक्षी विहार में भी जलापूर्ति होती है। बंशी पहाड़पुर के सूखा शिला में हथौड़ा व कंप्रेशर-ड्रिलिंग मशीन से खसरा नंबर 122, 205, 4401, 4372 से लगभग 50,000 टन से भी अधिक पत्थरों का खनन हो चुका है। कंपन का प्रभाव और कंपन स्तर संभावित प्रभाव अवैध खनन से 50 फीट गहरे गड्ढे तक बन गए खनन के कारण कई स्थानों पर 30 फीट से लेकर 50 फीट के गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे आसपास के ग्रामीणों और मवेशियों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। वहीं मामले में डीएफओ प्रमोद धाकड़ का कहना है कि जहां माइनिंग होती है, वहां लगातार निगरानी भी की जा रही है। वहां से 1 किमी तक हम दीवार लगाकर क्षेत्र को बंद कर रहे हैं। यदि कहीं अवैध खनन होता पाया गया तो सख्त कार्रवाई करेंगे। भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो होता मिला अवैध खनन इधर, खनन माफिया खुलेआम बंध बारैठा डैम से 2 किलोमीटर दूर बंध बारैठा चौकी के सामने से सुबह 4 बजे से 10 तक ट्रैक्टर से अवैध खनन कर मोर्रम, खंडे व पत्थरों को बेखौफ ले जाते हैं, लेकिन जिस क्षेत्र में एक पत्थर उठना भी कानूनन अपराध है। भास्कर एक्सपर्ट - डॉ सत्यप्रकाश मेहरा प्रोजेक्ट हेड अरावली ग्रीन वर्ल्ड फॉउंडेशन मशीनों के कंपन से दरक रहीं हैं चट्टानें बारैठा बांध केवल मिट्टी से नहीं बना है, बल्कि इसकी स्थिरता नीचे स्थित चट्टानी आधार पर निर्भर करती है। खनन और मशीनरी से उत्पन्न कंपन समय के साथ चट्टानों के बीच की प्राकृतिक पकड़ कमजोर कर देते हैं। वाइब्रेशन से नींव कमजोर होने से सीपेज या सतह का धंसना बढ़ सकता है। डायनामिक लोड और बांध की नेचुरल फ्रीक्वेंसी के बीच रेजोनेंस इंट्रैक्शन से डिफॉर्मेशन और बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार 10,000 कंपन चक्र मिट्टी की मजबूती में 10–25% कमी आती है। बारैठा बांध के आसपास हो रहे खनन एवं मशीनरी गतिविधियों से उत्पन्न कंपन तत्काल बांध को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार यह कंपन धीरे-धीरे मिट्टी की मजबूती को कम करते हैं। अगले 5 से 20 वर्षों में बांध में सीपेज, आंतरिक कटाव और गंभीर संरचनात्मक खतरे की संभावना बढ़ सकती है।
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