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    एक्सीडेंट में प्रेग्नेंट पत्नी और 3 बच्चियों की मौत:कार चला रहा पति हुआ घायल, ससुर पुलिस से बोला- ये एक्सीडेंट नहीं मर्डर, पार्ट-1

    6 months ago

    4 अक्टूबर 2016, रात 11.15 बजे। जोधपुर जिले के बिलाड़ा थाने का अधिकतर पुलिस स्टाफ सुस्ता रहा था। जो पुलिसवाले गश्ती की ड्यूटी पर थे, वो फील्ड में निकलने के लिए तैयारी कर रहे थे। तभी थाने पर सूचना आती है कि बिलाड़ा से भावी रोड पर दो कारों में जोरदार भिड़ंत हो गई है। तत्काल पुलिस टीम मौके के लिए रवाना होती है। वहां पहुंचने पर पता चलता हैं कि एक्सीडेंट नैनो और इनोवा कार के बीच हुआ था। इस एक्सीडेंट में नैनो सवार महिला व पुरुष और 3 बच्चियों की हालत गंभीर बनी हुई थी। पुरुष को छोड़कर बाकी सभी बेहोशी की हालत में थे। पुरुष के भी हाथ-पैर में काफी चोटें थी। पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर मौजूद लोगों की सहायता से एम्बुलेंस में सभी को बिलाड़ा CHC में भेजा। यहां डॉक्टरों ने मेडिकल चेकअप के बाद प्रेग्नेंट महिला और 3 मासूम बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। घायल शख्स को इलाज के लिए हायर सेंटर जोधपुर रेफर कर दिया। मृतकों व घायलों की तत्काल पहचान भी नहीं हो पाई। हालांकि नैनो कार में मिले आईकार्ड में राजेंद्र उर्फ राजूराम निवासी अजमेर का एड्रेस लिखा था। पुलिस ने इसी एड्रेस के आधार पर पड़ताल शुरू की। सामने आया कि कार सवार राजेंद्र अजमेर में बबायचा गांव के रहने वाले भंवरलाल बंजारा का बेटा है। हादसे की सूचना मिलते ही भंवरलाल बंजारा अगली सुबह बिलाड़ा पहुंच गए। राजेंद्र के पिता भंवरलाल ने पुलिस को बताया- नैनो कार में उनका बेटा राजेंद्र, उसकी 8 महीने की प्रेग्नेंट पत्नी ललिता देवी (29) अपनी तीन बच्चियों संतोष (6), जमुना (4) और काजल (3) के साथ पैतृक निवास स्थान चिचड़ली गांव की ओर जा रहे थे। रास्ते में सामने से आ रही एक इनोवा कार से उनका एक्सीडेंट हो गया। हादसे में ललिता देवी और तीनों बच्चियों की मौत हो गई। घायल राजेंद्र का जोधपुर में इलाज चल रहा था। भंवरलाल की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात इनोवा ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाकर एक्सीडेंट करने का मामला दर्ज कर लिया गया। मामले की जांच तत्कालीन एसएचओ घेवर सिंह को सौंप दी गई। अब तक इस एक्सीडेंट की जानकारी पुलिस ने राजेंद्र के ससुर जयराम गवारिया को भी दे दी। जयराम जोधपुर जिले के तिंवरी के मूल निवासी थे। लंबे समय से वो नागौर जिले के डीडवाना में रह रहे थे। वो भी तत्काल 5 अक्टूबर की शाम होते-होते बिलाड़ा थाने पहुंच गए थे। उन्होंने आते ही इस एक्सीडेंट की घटना पर ही शक जता दिया। जोर-जोर से चिल्लाने लग गए कि दामाद राजेंद्र उर्फ राजूराम ने ही उनकी बेटी ललिता और तीनों दोहितियों की हत्या की है। हालांकि उसके ये आरोप वहां खड़े किसी भी शख्स के गले नहीं उतर रहे थे। पुलिस स्टाफ ने भी उसकी इन बातों और दावों को महज इमोशंस और हड़बड़ाहट में लगाए गए आरोप माना और ज्यादा ध्यान देना उचित नहीं समझा। इसका भी वाजिब कारण था। पुलिस के सामने हाईवे पर हुए इस एक्सीडेंट के प्रत्यक्षदर्शी मौजूद थे। इतना ही नहीं दामाद राजूराम बंजारा पर वो इतना संगीन आरोप लगा रहे थे, वो भी तो सीरियस कंडीशन में जोधपुर हॉस्पिटल में एडमिट था। बार-बार समझाने के बाद भी जयराम इस घटना को एक्सीडेंट मानने को तैयार नहीं हो रहे थे और इसे हत्या ही बता रहे थे। इस बीच तत्कालीन एसएचओ घेवर सिंह वापस हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में पहुंचे। सभी डेड बॉडीज का बारीकी से इंस्पेक्शन किया। मृतकों के शरीर पर कोई बड़ी या गहरी चोट नजर नहीं आ रही थी। उन्होंने डॉक्टर टीम से उनका ओपिनियन पूछा तो सामने आया कि मृतकों के शरीर पर कोई चोट या घाव बाहरी तौर पर नहीं दिख रहा था। न ही कोई ब्लीडिंग दिख रही थी। बावजूद इसके पोस्टमाॅर्टम से पहले मौत के कारणों पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता था। एक्सीडेंट में बॉडी में इंटरनल चोट भी मौत का कारण हो सकती थी। कल राजस्थान क्राइम फाइल्स, पार्ट-2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…
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